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फेसबुक आपके बारे में क्या-क्या जानता है || Facebook

यह जानकर थोड़े ज़्यादा जागरुक तो हो सकते हैं कि आखिर फेसबुक(Facebook) को हमारे बारे में क्या-क्या पता है। फेसबुक(facebook) आपके बारे में क्या-क्या जानता है।

1- नाम, पता, उम्र जैसी निजी जानकारियां

फेसबुक(Facebook) की प्रोफाइल में नाम, पता, उम्र आदि लिखना तो आम बात है. अब सोचिए जरा, अगर हर व्यक्ति इमानदारी से अपना फेसबुक (Facebook)प्रोफाइल बनाता है तो फेसबुक(Facebook) के लिए कितना आसान हो जाएगा ये ट्रैक करना कहां पर कितने लोग रहते हैं और उनके नाम, पते और उम्र क्या है. फेसबुक(Facebook) पर अकाउंट बनाने की न्यूनतम सीमा 13 साल है, तो इस तरह से 13 साल और उससे अधिक के लोगों की जानकारी तो फेसबुक(Facebook) जुटा ही लेगा. कुछ समय पहले यह भी सुनने में आया था कि फेसबुक(Facebook) बच्चे के लिए भी चैटिंग ऐप ला रहा है, जिसे उनके माता-पिता कंट्रोल कर सकेंगे. अब सोचिए, अगर ऐसा हो जाता है तो बच्चों से लेकर बड़ों तक, सबके बारे में फेसबुक(Facebook) को पता होगा. यानी जनगणना 10 साल में होती है, लेकिन फेसबुक(Facebook) से देश की आबादी का लगभग सही अंदाजा हर साल या यूं कहें कि हर महीने भी लगाया जा सकेगा.

2- आपकी पसंदीदा जगह और खाना

यूं तो कई बार हमसे कोई पूछता है कि हमें क्या पसंद है तो हम कुछ बातें बता देते हैं और कुछ छुपा भी लेते हैं, लेकिन जाने अनजाने में फेसबुक(Facebook) पर हम अपने सारे राज जाहिर कर देते हैं. फेसबुक(Facebook) का ऐप आपके लोकेशन की एक्सेस करने की अनुमति मांगता है, तो अधिकतर लोग वो अनुमति दे भी देते हैं. लेकिन क्या आपको पता है कि जब आप किसी मॉल में जाते हैं या किसी दुकान में जाते हैं तो फेसबुक(Facebook) को उसके बारे में भी पता चल जाता है. जब कभी आप अपनी पसंदीदा फिल्म देखने जाते हैं तो आपकी पसंद का पता फेसबुक(Facebook) को चल जाता है. कभी किसी रेस्टोरेंट में जाते हैं और दोस्तों या परिवार से साथ खाना खाते समय अपने फेसबुक पर लिखते हैं कि आप उस रेस्टोरेंट में खाना खा रहे हैं, तो इससे भी फेसबुक को आपकी पसंद समझ आ जाती है. इसके बाद शुरू होता है फेसबुक का काम. वो आपको आपकी पसंद के हिसाब से कस्टमाइज करके विज्ञापन दिखाना शुरू कर देता है और अपनी कमाई बढ़ाता है.

3- अब तो चेहरा भी पहचानता है फेसबुक

कहीं आप फेसबुक की फेस रिकॉग्निशन तकनीक को भूल तो नहीं गए? फेसबुक आपके दोस्तों के साथ खींची गई आपकी किसी तस्वीर में ये कैसे जान जाता है कि आप उनमें से आप कौन हैं? ये कमाल है फेस रिकॉग्निशन तकनीक का. देखा जाए तो इससे आपको अपने दोस्तों को टैग करने में आसानी होती है और इसी के चलते आपने कभी फेस रिकॉग्निशन के लिए अपनी आपत्ति दर्ज नहीं की, लेकिन क्या आपको पता है कि इसका दुरुपयोग भी हो सकता है? फेसबुक पर आपकी तस्वीरों को स्कैन करके फेसबुक आपके चेहरे को या यूं कहें कि आपकी किसी भी तस्वीर को पहचान सकता है. यानी अगर कहीं पर भीड़ में भी आपकी तस्वीर खिंच गई और वह फेसबुक पर पहुंची तो फेसबुक आपको तुरंत पहचान लेगा.

दरअसल, फेसबुक की ये तकनीक लोगों के फायदे की बताई जा रही है और कहा जा रहा है कि इसका फायदा ये होगा कि अगर कोई आपकी तस्वीर का दुरुपयोग करने के लिए फेसबुक पर अपलोड करेगा तो आपके पास उसका नोटिफिकेशन आ जाएगा. अब जरा दूसरा पहलू भी समझिए, क्या आपको नहीं लगता कि इस तरह फेसबुक आपकी निजी जिंदगी में दखल देना शुरू कर रहा है? अगर फेस रिकॉग्निशन को तस्वीर और वीडियो दोनों में फेसबुक लागू करता है तो आप दुनिया में कहीं चले जाएं, अगर वहां फेसबुक का एक्सेस है तो फेसबुक आपको पहचान लेगा. यानी निजी जैसा अब कुछ नहीं रहेगा.

4- यूजर की साइकोलॉजी क्या है

फेसबुक ये भी जान जाता है कि आप अपनी कौन-कौन सी जानकारी कितनी आसानी से दे सकते हैं. इस तरह से यूजर्स की साइकोलॉजी को पता लगाया जता है. कैंब्रिज एनालिटिका के मामले में ऐसा ही हुआ है. अक्सर ही फेसबुक पर आपको छोटे-छोटे मजेदार से गेम देखने को मिल जाते हैं, जैसे आपकी शक्ल किस हीरो या हीरोइन से मिलती है? आप कब और कैसे मरेंगे? आपको कौन मारेगा? आप अगर राजनीति में होते तो कौन से नेता होते? हालांकि, ये सब गेम सिर्फ टाइमपास होते हैं. इनका वास्तविकता से दूर-दूर तक का कोई वास्ता नहीं होता है, लेकिन लोग इन्हें खेलते हैं और एंजॉय करते हैं. जब आप ऐसे गेम खेलते हैं तो आपसे कहा जाता है कि वह गेम आपकी प्रोफाइल को एक्सेस करेगा यानी आपकी प्रोफाइल देखेगा और वहां से कुछ जानकारी लेगा. अधिकतर लोग बिना सोचे-समझे इजाजत दे भी देते हैं. खैर, फेसबुक आपको कुछ नुकसान पहुंचाता भी नहीं, लेकिन जब फेसबुक पर जमा ये जानकारियां लीक होती हैं, तो बड़ा नुकसान हो सकता है. इन गेम्स के दौरान कई बार आपसे कुछ और भी चीजें पूछी जाती हैं, जिनका आप क्या जवाब देते हैं, ये भी फेसबुक ध्यान देता है.

5- मोबाइल नंबर

यूं तो फेसबुक पर भी लोगों से उनके मोबाइल नंबर मांगे जाते हैं, लेकिन ये जरूरी नहीं कि हर कोई अपना मोबाइल नंबर दे. जो लोग मोबाइल नंबर फेसबुक को नहीं बताते, शायद उन्हें लगता है कि उनके मोबाइल नंबर के बारे में फेसबुक को पता नहीं है. आपको बता दें कि अब फेसबुक और वाट्सऐप दोनों ही मार्क जुकरबर्ग के कब्जे में हैं, तो भले ही आप फेसबुक पर नंबर ना दें और वाट्सऐप चलाएं, तो भी आपका नंबर फेसबुक को पता चल ही जाएगा.आखिर कैंब्रिज एनालिटिका का मामला भी तो ऐसा ही है ना. पर्सनैलिटी टेस्ट के नाम पर आपका डेटा चुरा लिया गया और उसकी मदद से मतदाताओं का व्यवहार बदलने की कोशिश की गई. यह भी बात सामने आई है कि 2016 में डोनाल्ड ट्रंप ने चुनाव के दौरान कैंब्रिज एनालिटिका की मदद ली थी. इसके तहत आपकी पुरानी पोस्ट देखकर आपके व्यवहार के बारे में पता लगाया जाता था और फिर एक कैंपेन के तहत आपका मन बदलने की कोशिश की जाती थी. डोनाल्ड ट्रंप को जिताने में इसका अहम योगदान था.

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