Story

Motorola Start to Death Story

जाने मोटोरोला(Motorola) के बनने और मिटने की कहानी

जब चांद पर पहली बार आर्मस्ट्रॉन्ग ने कदम रखा तो वहां से धरती पर लोगों के लिए एक बाद कही (one small step for man, one giant leap for mankind”) ‘इंसान के लिए एक छोटा सा कदम और इंसानियत के लिए एक बड़ी उपलब्धि’। इसमें कोई शक नहीं कि आर्मस्ट्रॉन्ग की यह उपलब्धि महान थी लेकिन इसमें तकनीक का योगदान भी अहम था। चांद पर पहुंचकर और वहां से कही बात धरती तक आई। उनकी इस बात को धरती पर जन-जन तक पहुंचाने में जिस तकनीक का योगदान रहा वह थी मोटोरोला (Motorola) की।

आर्मस्ट्रॉन्ग ने चांद से जिस ट्रान्सिवर पर वह बात कही वह मोटोरोला(Motorola) का था। तकनीक के क्षेत्र में ऐसे ही कई महत्वपूर्ण अविष्कारों के लिए मोटोरोला(Motorola) का नाम हमेशा आता रहा है। यही वह कंपनी है जिसे सूचना क्षेत्र में क्रांति लाने का श्रेय जाता है। वर्ष 1973 में मोटोराला(Motorola) ने ही पहले मोबाइल फोन का इजाद किया था और अब हर किसी के हाथ में मोबाइल है। परंतु किस्मत देखिए कि आज उस कंपनी का नाम-ओ-निशां मिटने वाला है।

वर्ष 2014 में लेनोवो ने मोटोरोला(Motorola) का अधिग्रहण किया था। उस वक्त मोटोरोला(Motorola) का अधिकार गूगल के पास था। इसके बाद कहा गया कि दोनों कंपनियां अलग-अलग कार्य करेंगी और मोटोरोला(Motorola) ब्रांड रहेगा। परंतु मोटोरोला के सीओओ रिक आॅट्रेलोह ने जानकारी दी कि लेनोवो द्वारा अब मोटोरोला(Motorola) को फेज आउट किया जाएगा और अब मोटोरोला(Motorola) फोन मोटो बाई लेनोवो के नाम से उपलब्ध होंगे। लेनोवो के इस कदम के बाद मोटोरोला(Motorola) इतिहास बन जाएगा। परंतु आपको मालूम है कि मोटोरोला(Motorola)  की शुरूआत कैसे हुई और इसका अब तक का इतिहास कैसा रहा है।

जानें क्या है गूगल का प्रोजेक्ट लून और कैसे गुब्बारे से मिलेगा इंटरनेट

सफर मोटोरोला(Motorola)
पाउल वी गेल्विन ने वर्ष 1930 में मोटरोला(Motorola) की स्थापना की थी इससे पहले यह कंपनी गैलविन मैन्यूफैक्चरिंग कॉरपोरेशन के नाम से थी और कपंनी ने 1928 में मोटोरोला नाम से बैटरी एलमिनेटर को पेश किया था। यहीं से मोटोरोला नाम आया। उस वक्त कंपनी मोटर गाड़ी के लिए कार्य करती थी। वर्ष 1930 में मोटोरोला ने विश्व का पहला कार रेडियो बनाया जो बेहद लोकप्रिय हुआ।

मोटोरोला का नाम मोटोर और पुराने जमाने की मशहुर म्यूजिक ओला के संयोग से बना है। मोटोरोला रेडियो इतना प्रचलित हुआ कि गैल्विन ने कंपनी का नाम ही बदलकर मोटोरोला रख दिया। वर्ष 1930 में उन्होंने इसका ट्रेडमार्क भी प्राप्त कर लिया।

चांद तारों का छू लिया
रेडियो के साथ कंपनी को तकनीक का अनुभव हो गया था और वर्ष 1940 में कंपनी ने वॉकी-टॉकी का निर्माण किया। एससीआर-300 नाम से लॉन्च किए गए इस वॉकी-टॉकी का उपयोग द्वितीय विश्व युद्ध के समय अमेरिकी सेना में किया गया।

मोटोरोला के वॉकिटॉकी अमेरिकी सेना में उपयोग होने लगे और कंपन ने द्वितीय विश्व युद्ध के समय ही हैंड हेल्ड एएम रेडियो का निर्माण किया और इसका भी उपयोग सेना में किया गया। इस युद्ध तक कंपनी अमेरिका के 94 प्रमुख कंपनियों में से एक थी जो सेना को साजो सामान मुहैया करा रही थी।

वर्ष 1956 में मोटोरोला एक बार फिर से सुर्खियों में था। कंपनी ने विश्व का पहला पेजर लांच किया। इस पेजर का उपयोग 40 किलोमीटर के दायरे में किया जा सकता था। इन आविष्कारों के का मोटोरोला की लोकप्रियता पर काफी असर पड़ा और 1958 से मोटोरोला ने नासा को रोडियो इक्यूपमेंट मुहैया कराना शुरू कर दिया। वहीं जब 1969 में पहली बार जब आर्म स्ट्रॉन्ग चांद पर पहुँचे तो वहां से उन्होंने मोटोरोला ट्रांसिवर से ही पृथ्वी पर संदेश भेजा।

वर्ष 1960 में कंपनी ने कोडलेस टेलीवीजन का प्रदर्शन कर सबको चौंका दिया। इसके बाद में टेलीविजन का विकास किसी से छुपा नहीं है। वहीं 1973 में वह ऐतिहासिक पल आया जब मोटोरोला ने विश्व में पहली बार मोबाइल का प्रदर्शन किया। इस आविष्कार ने विश्व भर में मोटोरोला का लोहा मनवा दिया।

कंपनी के वायस प्रेसिडेंट डॉ. मार्टीन कूपर ने मोटोरोला डायनाटेक 8000एक्स का निर्माण किया था। 10 साल बाद जाकर इस इस फोन को एफसीसी (फेडरल कम्यूनिकेशन कमीशन) द्वारा विश्व का पहला मोबाइल सेलफोन घोषित किया गया। 1995 में कंपनी ने टू वे पेजर को लांच कर कम्यूनिकेशन के क्षेत्र में नया आयाम स्थापित किया। अगले ही साल वर्ष 1996 में मोटोरोला ने क्लैमशेल डिजाइन का फोन प्रदर्शित किया। कंपनी द्वारा फ्लैप डिजाइन में मोटोरोला स्टारटैक फोन को पेश किया था।

और बिक गया मोटोरोला
वर्ष 2000 मोटोरोला विश्व की नंबर एक मोबाइल निर्माता कंपनी थी लेकिन यहीं कंपनी को नजर लग गई अपना ताज गंवाना पड़ा। कंपनी ने वर्ष 2004 में मोटोरोला रेजर वी3 मोबाइल फोन को लॉन्च किया। डिजाइन के मामल में इस फोन ने काफी तारीफें बटोरीं। कंपनी ने साबित कर दिया कि क्लैमशेल डिजाइन में इसका कोई शानी नहीं है लेकिन बाकी मॉडल बेहतर नहीं कर रहे थे।
मोबाइल फोन सेग्मेंट में कंपनी नोकिया, सोनी (तत्काल सोनी एरिक्सन), सैमसंग और एलजी से पिछड़ती चली गई।

2006 में कंपनी ने मोटो मिंग टच को लॉन्च कर वापसी कोशिश की लेकिन कामयाब नहीं हुआ। इन फोन में हैंडरायटिंग रिकॉग्निशन को सपोर्ट था। वर्ष 2007 से लेकर 2009 तक कंपनी को लगभग 4.3 बिलियन डॉलर का घाटा हुआ और यहां से मोटोरोला मे सुगबुगाहट शुरू हो गई। 4 मई 2011 को मोटोरोला को मोटोरोला मोबिलिटी और मोटोरोला सोल्यूशंस नाम से दो कंपनियों में बांट दिया गया।

15 अगस्त 2011 मोटोरोला के इतिहास का शायद काला दिन कहा जा सकता है। इस दिन मोटोरोला पहली बार बिक गया। कंपनी द्वारा आधिकारिक रूप से घोषणा की गई कि मोटोरोला मोबिलिटी का अधिकार गूगल को सौंप दिया गया है।

गू्गल ने भी छोड़ा मोटोरोला का साथ
मोटोरोला मोबिलिटी के सीईओ संजय झा और गूगल के सीईओ लैरी पेज ने साझा रूप से यह बयान जारी किया कि मोटोरोला मोबिलिटी गूगल को सौंप दिया जाएगा जिसके एवज में गूगल मोटोरोला के शेयर धरकों को प्रतिशेयर 40 डॉलर चुकाएगा।

गूगल और मोटोरोला का यह सौदा लगभग 12.5 बिलियन डॉलर का था। 22 मई 2012 को मोटोरोला मोबिलिटी पर पूरी तरह से गूगल का अधिकार हो गया। इसके बाद आशा थी कि गूगल नेक्सस डिवाइस का निर्माण खुद करेगा। क्योंकि उस वक्त तक गूगल का ऑपरेटिंग सिस्टम एंडरॉयड बेहद ही लोकप्रिय हो चुका था। परंतु ऐसा हुआ नहीं और मोटोरोला को एक बार फिर अपनी बोली लगानी पड़ी।

लेनोवो ने थामा मोटोरोला का दामन
लगभग डेढ़ साल बाद 29 जनवरी 2014 अचानक यह खबर आई कि मोटोरोला मोबिलिटी को गूगल से लेनोवो ने खरीद लिया है। यह खबर हर किसी के लिए चौंकाने वाली थी। तत्कालीन गूगल के सीईओ व को फाउंडर लैरी पैज और लेनोवो के सीईओ यंग उआंकिंग ने साझा रूप से यह बयान जारी कर इस बात की पुष्टि की थी।

चीनी कंपनी लेनोवो ने मोटोरोला को 2.91 बिलियन यूएस डॉलर में खरीदा। इस कीमत को कंपनी दो भाग में चुकाएगी। जिसमें पहला भाग 1.41 बिलियन यूएस डॉलर का है जिसमें 660 मिलियन यूएस डॉलर नगद और 750 मिलियन यूएस डॉलर के शेयर (अंश) देने हैं। वहीं बाकी बचा 1.5 बिलियन यूएस डॉलर को कंपनी तीन सालों में चुकाएगी। वैसे तो लेनोवो का इतिहास कंप्यूटर सेग्मेंट से जुड़ा है लेकिन इस वक्त तक कंपनी ने स्मार्टफोन बाजार में दस्तक दे दिया था।

विदाई की तैयारी
हालांकि मोटोरोला के अधिग्रहण के बाद लेनोवो और मोटोरोला दोनों ओर से यह बयान आया था कि कंपनियां अलग-अलग कार्य करेंगी जैसा कि अभी कर ही है। परंतु इन दो सालों में समय ने करवट ली और… एक आविष्कारक एक दुखद अंत की ओर बढ़ चला।

http://Youvisitors.xyz

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *